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समर्पण


श्री मुलाचार्य के व्दादश शिष्यों में से श्री प्रातः स्मरणीय ,प्रथम पूज्य ,त्याग मंदिर गुरुपदेशपालक, पाप घालक ,पातकपोत डाकनी श्री १००८ श्री मद द्वारकादास जी महाराज जिनके शिष्य श्री १०८ श्री रामरज्जजी के श्री नारायणदास जी, श्री रामरस जी, के श्री अम्रतराम जी महाराज आप की शिष्य परम्परामय पूज्यतम् प्रभावशाली ,प्रशांत चित्त ,सरल प्रकृति ,श्री अमृतराम जी महाराज जिन्हो के शिष्य श्री १०८ श्री रमता राम जी महाराज व् श्री पूज्यपाद ,मेरे परमाधार,पवन प्रभात,पुण्य पुंज्ज, उदारधिषणा,श्री १०८ श्री राम जतन जी महाराज यहाँ मेरे परमाधार जीवन के संचालक ,प्रकाशक ,एवं शिक्षक हैं | आप का ही कृपा प्रसाद और आप का ही बालक;पूज्यतम् गुरुदेव ! तुच्छ बुद्धि कृतचार शब्द आप के ही लिए अर्पण करता है |आशा है ,दास की इस टूटी फूटी सेवा को स्वीकृत करेंगे |और अपना बालक जान सब भूल क्षमा करेंगे किम्रअधिकं विस्तरेण | सर्व पूर्वजो को ये वेबसाइट समर्पण है |

 

परमाधार (पंडित मनोहरदास जी महाराज) रामस्नेही जो रामस्नेही धर्म दर्पण के लेखक रहे है उन्हीं के शिष्य दयालदास रामस्नेही द्वारा इस वेबसाइट का निर्माण कराया गया है जो गुरुदेव को अर्पण है।

श्री राम स्नेही धर्म दर्पण